सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए महिला अधिकारियों को दिए गए स्थायी कमीशन (Permanent Commission) के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वे महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी (SSCOs), जिन्हें किसी भी स्तर पर सेवा से हटा दिया गया था, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा। इसके साथ ही उन्हें पेंशन का हक मिलेगा, हालांकि उन्हें वेतन का बकाया नहीं दिया जाएगा।
20 साल की सेवा को माना जाएगा पूरा
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने स्पष्ट किया कि पेंशन के लिए जरूरी न्यूनतम 20 साल की सेवा पूरी मानी जाएगी, भले ही अधिकारी को पहले ही सेवा से हटा दिया गया हो।
यह फैसला विंग कमांडर सुचेता एदान समेत कई याचिकाओं पर सुनाया गया है, जिनमें 2019 की नीति में बदलाव और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के पुराने फैसलों के आधार पर स्थायी कमीशन से इनकार को चुनौती दी गई थी।
ACR में लापरवाही का जिक्र
फैसले के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) अक्सर इस धारणा के साथ तैयार की जाती थी कि उन्हें करियर में आगे बढ़ने या स्थायी कमीशन का मौका नहीं मिलेगा।
मेरिट पर पड़ा असर
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस सोच के कारण उनकी ओवरऑल मेरिट पर नकारात्मक असर पड़ा। साथ ही बेंच ने थल सेना, वायु सेना और नौसेना की महिला एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन से वंचित किए जाने के मामलों पर अलग से विचार करने की बात भी है।
















