अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आज सुबह 3 बजकर 58 मिनट पर Kennedy Space Center, फ्लोरिडा से Artemis II मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह मिशन 54 साल बाद इंसानों को फिर से चंद्रमा की ओर ले जाने वाला पहला अभियान है।
इससे पहले 1972 में Apollo 17 के दौरान इंसान चांद तक पहुंचे थे। अब आर्टेमिस-II के जरिए चार अंतरिक्ष यात्री Orion capsule में सवार होकर चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर सुरक्षित धरती पर लौटेंगे। यह मिशन अंतरिक्ष यात्रा के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।
चांद की कक्षा में एक दिन बिताएंगे एस्ट्रोनॉट्स
यह मिशन चांद पर उतरने वाला नहीं है, लेकिन भविष्य में मानव मिशनों के लिए अहम तैयारी करेगा। इस 10 दिन के मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। ये सभी चंद्रमा की कक्षा में करीब एक दिन तक चक्कर लगाएंगे और कई महत्वपूर्ण प्रयोग करेंगे।
पहली बार अंतरिक्ष में ले गए स्मार्टफोन
इस बार मिशन की एक खास बात यह भी है कि अंतरिक्ष यात्री अपने साथ पर्सनल स्मार्टफोन लेकर गए हैं। Jared Isaacman ने पहले ही जानकारी दी थी कि इसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को आधुनिक साधन देना है, ताकि वे अपने अनुभवों को बेहतर तरीके से कैद कर सकें और दुनिया के साथ साझा कर सके।
आर्टेमिस II मिशन के एस्ट्रोनॉट्स-
इनमें कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।
- रीड वाइसमैन इस मिशन के कमांडर हैं। वह नासा के अंतरिक्ष यात्री, अमेरिकी नौसेना के एविएटर और टेस्ट पायलट हैं। आर्टेमिस-2 उनकी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान है।
- विक्टर ग्लोवर अंतरिक्षयान के पायलट हैं। नासा के यह अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाने वाले इतिहास के पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे।
- क्रिस्टीना कॉश इस मिशन में एक्सपर्ट के रूप में शामिल है। वह नासा की इंजीनियर और वैज्ञानिक हैं। इनके पास 328 दिनों तक अंतरिक्ष उड़ान का रिकॉर्ड है। वह पहली वुमेन स्पेस वॉक का हिस्सा रह चुकी है।
- जेरेमी हैनसेन इस मिशन में शामिल चौथे एस्ट्रोनॉट हैं। जेरेमी हैनसेन इस मिशन में एक्सपर्ट के तौर पर शामिल हैं। वह कनाडाई स्पेस एजेंसी से जुड़े हैं। जेरेमी हैनसेन रॉयल कनाडाई एयरफोर्स के फाइटर पायलट हैं और यह इनकी पहली अंतरिक्ष उड़ान है।
आर्टेमिस II मिशन क्या है?
आर्टेमिस II मिशन का उदेश्य चंद्रमा पर स्थाई मानव उपस्थिति बनाना। भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन को संभव बनाना। पृथ्वी से बाहर अंतरिक्ष के मौसम की जांच करना। कोरोनल मास इजेक्शन यानी सूर्य के कोरोना से निकलने वाले प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के बड़े विस्फोट की जांच करना। साथ ही सोलर फ्लेयर्स की निगरानी करना यानी सूर्य की सतह पर होने वाले विशाल चुंबकीय विस्फोट जो अत्यधिक रेडिएशन छोड़ते हैं, उसकी जांच करना है।
आर्टेमिस-2 अपना मिशन 10 दिन में पूरा करेगा। इस दौरान यान को ऑर्बिट से बाहर निकलने में एक दिन लगेगा। इसके बाद यान को चांद की तरफ जानें 3-4 दिन लगेंगे। वहीं एक दिन यान चांद के चारों तरफ घूमेगा फिर चांद से वापसी में 4 दिन का वक्त लगेगा।















