लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने लालू यादव सहित उनके पूरे परिवार के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इनमें उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती के साथ-साथ बेटे तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव और बेटी हेमा यादव भी शामिल हैं।
वहीं, इस मामले में राहत की बात यह है कि कुल 98 आरोपियों में से 52 लोगों को कोर्ट ने आरोपों से बरी कर दिया है।
लैंड फॉर जॉब घोटाला क्या है?
लैंड फॉर जॉब घोटाला, भ्रष्टाचार का केस है। यह साल 2004 से 2009 के बीच हुआ, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री हुआ करते थे। आरोप है कि लालू यादव ने अपने रेल मंत्री के पद का गलत इस्तेमाल किया और इसके जरिए रेलवे के ‘ग्रुप-डी’ के पदों पर नियुक्तियां की। इन नियुक्तियों के बदले उन्होंने और उनके परिवार ने उम्मीदवारों से रियायती दरों पर या गिफ्ट के तौर पर जमीनें हासिल की थीं
98 आरोपियों में लालू परिवार का कौन-कौन शामिल?
जांच के दौरान, इस केस में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेज प्रताप यादव, बेटे तेजस्वी यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 98 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें अब लालू परिवार को सदस्यों पर आरोप तय हो गए हैं, जबकि 52 लोगों को आरोप मुक्त किया जा चुका है।
लालू परिवार को कितनी सजा हो सकती है?
लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में आरोप तय होने के बाद अब लालू परिवार के सदस्यों को संभावित सजा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा ने बताया कि इस केस में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 8, 9, 11, 12 और 13 लगाई गई हैं, जिनमें अधिकतम 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
इसके अलावा, आईपीसी की धारा 467, 468 और 471 भी इस मामले में शामिल हैं। इन सभी धाराओं को मिलाकर देखा जाए तो आरोपियों को अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है, बशर्ते अदालत सभी सजाएं एक साथ चलाने का आदेश दे। हालांकि, अगर कोर्ट सजाओं को क्रमवार (एक के बाद एक) चलाने का फैसला करती है, तो सजा की अवधि इससे अधिक भी हो सकती है।
अलग-अलग सजा को लेकर क्या नियम है?
जब कोर्ट यह कहती है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, तो दोषी को सिर्फ सबसे बड़ी सजा ही काटनी होती है। मतलब यह कि जितने साल की सबसे ज्यादा सजा सुनाई जाती है, उतने साल ही आरोपी को जेल में रहना पड़ता है।
















