गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम की रेती पर अध्यात्म की अलख गूंज रही है। तंबुओं की नगरी में संत-महात्मा और श्रद्धालु साधना में लीन हैं। भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि और गंगा मैया के जयकारे बांध के नीचे तक सुनाई दे रहे हैं। माघ मेला के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति की पुण्य बेला में आस्था की डुबकी लगाने के लिए बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में मेला क्षेत्र की ओर पहुंच रहे हैं। मकर संक्रांति का स्नान पर्व दो दिनों तक चलेगा।
सरकारी कैलेंडर के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति है, लेकिन उसका पुण्यकाल 15 जनवरी को है। 14 जनवरी की रात 9.39 बजे धनु राशि से सूर्य मकर में आकर दक्षिणायण से उत्तरायण होंगे। यहीं से संक्रांति लगेगी।
















