पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम आदेश दिया है। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि ‘तार्किक विसंगति’ के आधार पर नोटिस पाने वाले लगभग 12 लाख मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं और उन्हें जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ वर्तनी या मात्रा की छोटी-मोटी गलतियों, या पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड में अंतर के कारण किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच कम उम्र के अंतर को आधार बनाकर नाम काटना उचित नहीं है, क्योंकि भारत में बाल विवाह एक कड़वी सच्चाई रही है।
सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ’ब्रायन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया कि लोगों को उनके दादा-दादी या नाना-नानी के साथ उम्र के अंतर को लेकर ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी उपनाम की वर्तनी अलग पाई जाती है, तो सीधे नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है, जबकि भारत में नामों की वर्तनी में अंतर आम बात है।
बाल विवाह की हकीकत वहीं, चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि कुछ मामलों में माता-पिता और बच्चों के बीच सिर्फ 15 साल का अंतर पाया गया है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने सवाल उठाते हुए कहा कि मां और बेटे के बीच 15 साल का अंतर कैसे तार्किक विसंगति हो सकता है? हम ऐसे देश में रहते हैं जहां बाल विवाह एक वास्तविकता रही है। इस दौरान द्विवेदी ने यह भी कहा कि यदि चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो पूरी चुनाव प्रक्रिया ही रोक दी जानी चाहिए।
एक करोड़ से ज्यादा लोगों को भेजे गए नोटिस कोर्ट को बताया गया कि ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में नोटिस पाने वालों में अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन भी शामिल हैं। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि एक करोड़ से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। लोगों की परेशानी को समझना जरूरी है और जहां जरूरत होगी, अदालत उचित निर्देश देगी।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पहले से ही SIR प्रक्रिया का विरोध कर रही है। पार्टी का आरोप है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है।
टीएमसी का दावा – जनता की जीत सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि भाजपा का ‘SIR गेम’ अब खत्म हो गया है। उन्होंने दावा किया कि जिन करीब एक करोड़ नामों को हटाने की तैयारी थी, वे बचा लिए गए हैं और यह बंगाल की जनता की जीत है। नेताओं ने कहा कि मतदान का अधिकार खतरे में था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए सख्त रुख अपनाया।
















