अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। क्रूड ऑयल करीब 5.65 फीसदी की तेजी के साथ 70.86 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल राहत की बात यह है कि देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सुबह 6 बजे जारी किए गए ताजा रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।
आपके शहर में कितनी हुई कीमत?
| शहर | पेट्रोल का दाम | डीजल की कीमत |
| नई दिल्ली | 94.72 | 87.62 |
| चेन्नई | 100.75 | 92.34 |
| कोलकाता | 103.94 | 90.76 |
| हेदराबाद | 107.46 | 95.7 |
| बेंगलुरु | 102.92 | 89.02 |
| अहमदाबाद | 94.49 | 90.17 |
| जयपुर | 104.72 | 90.21 |
| लखनऊ | 94.69 | 87.8 |
| इंदौर | 106.48 | 91.88 |
| पूना | 104.04 | 90.57 |
| पटना | 105.58 | 93.8 |
क्या आगे और महंगा होगा तेल?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव या युद्ध लंबा चलता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसे में भारत में भी पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर
ग्लोबल ऑयल सप्लाई का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होता है। अगर इस समुद्री रास्ते में किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है और तेल-गैस की कीमतों में उछाल आ सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी देश के लिए चिंता का विषय बन सकती है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य कुछ समय के लिए बंद भी होता है, तो इसका तुरंत असर आम लोगों की जेब पर नहीं पड़ेगा।

दरअसल, भारत के पास करीब 10 दिनों का कच्चा तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे थोड़े समय तक स्थिति संभाली जा सकती है।
















