मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी ‘रिलायंस जियो’ अगले कुछ ही दिनों में अपने आईपीओ (IPO) के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल कर सकती है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आईपीओ करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) का हो सकता है. यह खबर ठीक ऐसे समय पर आई है जब 19 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना आम बैठक (AGM) होने जा रही है.
भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा आईपीओ
रिलायंस जियो का यह आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने जा रहा है. इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया ने 3.3 अरब डॉलर का आईपीओ लाकर देश में सबसे बड़े पब्लिक ऑफर का रिकॉर्ड बनाया था. लेकिन मुकेश अंबानी की जियो अब इस रिकॉर्ड को ध्वस्त करने के बेहद करीब है. हालांकि, साल 2026 में शेयर बाजार में आईपीओ की रफ्तार पिछले दो सालों के मुकाबले थोड़ी धीमी रही है, ऐसे में जियो की एंट्री घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेशकों के लिए एक नई जान फूंकने का काम करेगी.
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पुराने निवेशकों से चर्चा के बाद अंबानी ने बदला पूरा गेम
शुरुआती चर्चाओं में माना जा रहा था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज इस आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी, जिसे ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) कहा जाता है. लेकिन हालिया मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुकेश अंबानी ने मौजूदा वैश्विक निवेशकों के साथ वैल्यूएशन को लेकर हुई लंबी बातचीत के बाद अपना फैसला बदल लिया है. अब कंपनी ‘फ्रेश इशू’ यानी नए शेयर जारी करने का रास्ता चुन रही है. इसका मतलब यह है कि आईपीओ से जो भी पैसा जुटेगा, वह रिलायंस के प्रमोटर्स या पुराने निवेशकों की जेब में नहीं जाएगा. बल्कि वह पूरा पैसा सीधे जियो के बिजनेस को बढ़ाने, नई टेक्नोलॉजी लाने और 5G नेटवर्क को मजबूत करने में खर्च किया जाएगा.
मंदी के दौर से जूझ रहे रिलायंस के शेयरों को मिलेगा सहारा
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए साल 2026 अब तक थोड़ा मुश्किल भरा रहा है. खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में चल रहे तनाव और अस्थिरता के कारण रिलायंस के कोर रिफाइनिंग (तेल) बिजनेस पर काफी बुरा असर पड़ा है. यही वजह है कि मार्च तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 13% घट गया और रिलायंस के शेयरों में इस साल अब तक करीब 15% की गिरावट देखी जा चुकी है. पिछले साल की एजीएम में मुकेश अंबानी ने वादा किया था कि जियो की लिस्टिंग 2026 की पहली छमाही में कर दी जाएगी. तेल कारोबार की सुस्ती के बीच जियो का यह आईपीओ न सिर्फ इस वादे को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह रिलायंस के गिरते शेयरों को एक नया सहारा भी दे सकता है.
जियो अब एआई और 5G से बदलेगी आपकी दुनिया
साल 2020 में रिलायंस जियो ने दुनिया के 13 बड़े निवेशकों, जिनमें गूगल, मेटा, सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) और केकेआर शामिल हैं, से 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड जुटाया था. उस भारी-भरकम निवेश की बदौलत जियो पूरी तरह कर्जमुक्त (Net Debt-Free) कंपनी बन गई थी. आज जियो सिर्फ एक फोन कॉल करने वाली कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सॉल्यूशंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म्स में से एक है. 19 जून को दोपहर 2:00 बजे होने वाली वर्चुअल एजीएम में आम उपभोक्ताओं और निवेशकों की नजर इसी बात पर रहेगी कि जियो अपने डिजिटल और एआई बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए क्या नई घोषणाएं करती है.















