डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने वाले बैंक ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। Reserve Bank of India ने डिजिटल ट्रांजेक्शन में ग्राहकों की जिम्मेदारी से जुड़े नियमों में बदलाव का एक मसौदा जारी किया है। इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को ज्यादा सुरक्षा देना और छोटे स्तर के फ्रॉड मामलों में मुआवजे की व्यवस्था करना है।
आरबीआई ने इस मसौदे पर 6 अप्रैल 2026 तक आम लोगों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू किए जा सकते हैं।
बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी
प्रस्तावित नियमों के तहत आरबीआई ने ‘अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन’ की परिभाषा को और व्यापक बना दिया है। अब इसमें जबरदस्ती या धोखाधड़ी के जरिए कराए गए भुगतान भी शामिल होंगे।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि डिजिटल फ्रॉड के मामलों में अब सबूत जुटाने की जिम्मेदारी बैंक की होगी। यानी बैंक को यह साबित करना होगा कि गलती ग्राहक की थी, न कि बैंकिंग सिस्टम की।
इन स्थितियों में ग्राहक की ‘जीरो लायबिलिटी’
- बैंक की लापरवाही: यदि धोखाधड़ी बैंक की किसी कमी या लापरवाही के कारण होती है।
- थर्ड-पार्टी ब्रीच: यदि किसी तीसरे पक्ष की चूक के कारण फ्रॉड होता है और ग्राहक इसकी सूचना 5 दिनों के भीतर बैंक को दे देता है।
अलर्ट और रिपोर्टिंग के लिए सख्त नियम
ग्राहकों को सतर्क रखने के लिए RBI ने अनिवार्य किया है कि ₹500 से अधिक के सभी डिजिटल लेनदेन पर बैंक तुरंत SMS अलर्ट भेजेंगे। इसके अलावा, बैंकों को डिजिटल धोखाधड़ी की रिपोर्ट करने के लिए 24×7 चैनल (जैसे हेल्पलाइन या पोर्टल) उपलब्ध कराने होंगे।
छोटे फ्रॉड के लिए मुआवजे का नया ढांचा
RBI ने पहली बार छोटे मूल्य की डिजिटल धोखाधड़ी के लिए एक निश्चित मुआवजे का प्रस्ताव रखा है। अब ₹50,000 तक के नुकसान वाले मामले मुआवजे के दायरे में आएंगे। इसके लिए मुआवजा राशि पीड़ित को शुद्ध नुकसान का 85% या ₹25,000 (जो भी कम हो) वापस मिलेगा।
यह मुआवजा एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार मिल सकेगा। इसके लिए फ्रॉड की सूचना 5 दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल दोनों को देनी अनिवार्य होगी।
मुआवजे का गणित और भुगतान की समय सीमा
नुकसान की भरपाई के लिए RBI और बैंकों के बीच हिस्सेदारी तय की गई है। ₹29,412 से कम के नुकसान पर मुआवजे का 65% हिस्सा RBI उठाएगा, जबकि ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक 10-10% वहन करेंगे। ₹29,412 से ₹50,000 के नुकसान पर अधिकतम मुआवजा ₹25,000 तय किया गया है। इसमें RBI ₹19,118 देगा और संबंधित बैंक ₹2,941 प्रत्येक देंगे।
बैंकों को आवेदन के 5 दिनों के भीतर ग्राहक को मुआवजे का भुगतान करना होगा। बैंक बाद में त्रैमासिक आधार पर RBI से अपने हिस्से की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) मांग सकेंगे।
















