CCTV कैमरों को लेकर सरकार ने सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। हाल ही में सामने आए एक मामले में खुलासा हुआ कि घरों और दफ्तरों में लगे कुछ CCTV कैमरों का डेटा पाकिस्तान भेजा जा रहा था, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया। जांच एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है और इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
इस घटना के बाद सरकार ने CCTV सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, CCTV कैमरे बेचने वाली कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तय किए गए सुरक्षा मानकों का पालन करें। साथ ही लोगों को भी सलाह दी गई है कि वे केवल उन्हीं कंपनियों के कैमरे लगाएं, जो सरकारी मानकों पर खरे उतरते हों।
CCTV सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In समेत कई एजेंसियां पहले भी CCTV कैमरों की सुरक्षा को लेकर चेतावनी दे चुकी हैं। जांच में पाया गया है कि कई IP कैमरों में कमजोर पासवर्ड और सॉफ्टवेयर अपडेट की कमी जैसी खामियां मौजूद हैं, जिससे उन्हें आसानी से हैक किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हैकर्स इन कैमरों के जरिए फुटेज एक्सेस कर सकते हैं और संवेदनशील जानकारी चोरी कर सकते हैं। खासतौर पर कुछ विदेशी, विशेषकर चीनी CCTV कैमरों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं, क्योंकि इन्हें रिमोट तरीके से एक्सेस कर डेटा बाहर भेजा जा सकता है।
नई गाइडलाइंस में क्या खास
सरकार ने CCTV से जुड़े खतरों को देखते हुए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। Cyber Swachhta Kendra के अनुसार, हैकर्स इन कैमरों को बॉटनेट में बदलकर एक साथ हजारों डिवाइस कंट्रोल कर सकते हैं।
नई गाइडलाइंस के तहत अब CCTV डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को अपने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा। साथ ही सख्त नियम लागू किए जाएंगे ताकि भविष्य में डेटा लीक और साइबर हमलों को रोका जा सके।
















