शेयर बाजार की नजरें शुक्रवार को होने वाले रिजर्व बैंक की पॉलिसी समीक्षा पर लगी हुई हैं. कच्चे तेल में उछाल की वजह से ये समीक्षा काफी अहम हो गई है. हालांकि बाजार को MPC के द्वारा 5 जून को घोषित किए जाने वाले ब्याज दर संबंधी फैसले में किसी बदलाव की संभावना नहीं है. लेकिन रिजर्व बैंक के कमेंट्स पर नजरें बनी रहेंगी. RBI रेपो रेट को मौजूदा 5.25% स्तर पर बरकरार रख सकता है. हालांकि बाजार अब ये भी कह रहा है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में दरों में एक बढ़ोतरी की संभावना बन गई है.
क्या है बाजार का अनुमान
सर्वे में शामिल अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों के शुरुआती प्रभाव को नजरअंदाज कर सकता है. हालांकि, बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्रीय बैंक भविष्य के लिए क्या संदेश और संकेत देता है.
सर्वे में शामिल करीब 70% अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि RBI अपनी ‘न्यूट्रल’ नीति रुख को बनाए रखेगा, जबकि लगभग एक-तिहाई एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेजी से बदलते वैश्विक माहौल को देखते हुए केंद्रीय बैंक का रुख कुछ अधिक सख्त हो सकता है.
अप्रैल की समीक्षा के बाद से कच्चे तेल की कीमतें RBI के अनुमानित स्तर से ऊपर बनी हुई हैं. वहीं रुपये में कमजोरी आई है और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन घटनाक्रमों ने चालू वित्त वर्ष के शेष हिस्से को लेकर बाजार की नजरिए को बदल दिया है.
क्या आगे बढ़ेंगी ब्याज दरें
सर्वे के अनुसार, 10 में से 7 अर्थशास्त्री अब वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना देख रहे हैं. यह पहले के उस अनुमान से अलग है जिसमें माना जा रहा था कि RBI लंबे समय तक दरों को स्थिर रख सकता है.
हालांकि अधिकांश अर्थशास्त्री ये भी मान रहे हैं कि अगर रिजर्व बैंक को दरों में बढ़ोतरी करनी होगी तो वो कुछ इंतजार कर सकता है और दरों में बढ़ोतरी की संभावना निकट भविष्य में नहीं है. सिर्फ 20% विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त में ही दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि 50% अर्थशास्त्री किसी भी संभावित बढ़त को अक्टूबर या उसके बाद ही मान रहे हैं.
क्या है जीडीपी को लेकर सर्वे में राय
सर्वे में आर्थिक वृद्धि को लेकर भी कमजोर संकेत मिले हैं. सर्वे में शामिल लगभग 60% का मानना है कि RBI अपने मौजूदा 6.9% GDP वृद्धि अनुमान में कटौती कर सकता है.
वहीं महंगाई के मोर्चे पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है. करीब 80% अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि RBI अपने महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 4.7% से 4.9% के दायरे में कर सकता है, जबकि बाकी विशेषज्ञ इसे 5% से अधिक रहने की संभावना जता रहे हैं.
10 में से 9 विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी वापस लेने का संकेत देने से बचेगा और अनिश्चित वैश्विक माहौल में लचीलापन बनाए रखेगा.
गवर्नर के बयान पर भी बाजार की नजर रहेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि गवर्नर का रुख सतर्क रहने वाला होगा और उनका फोकस महंगाई जोखिम, वैश्विक अनिश्चितताओं तथा भविष्य की नीतिगत कार्रवाइयों के लिए आंकड़ों पर आधारित दृष्टिकोण पर रहेगा.















