अगर आप इस साल पहली बार इनकम टैक्स भर रहे हैं, तो आपको हर कदम ध्यान से रखना होगा। आपकी एक छोटी सी गलती आपका रिफंड अटका सकती है। इतना ही नहीं आपके घर पर आयकर विभाग का नोटिस भी आ सकता है। आज हम आपको एक ऐसी ही गलती के बारे में बताने वाले हैं, जो ज्यादातर नए टैक्सपेयर करते हैं।
नए टैक्सपेयर्स सिर्फ आईटीआर फाइल करके रिफंड का इंतजार करने लगते हैं, लेकिन वो इनकम टैक्स फाइल करने के बाद सबसे जरूरी स्टेप ई वेरिफिकेशन पूरा नहीं करते हैं। इसकी वजह से उनका आईटीआर वैध नहीं माना जाता है।
आखिर क्या है e-Verification?
ई वेरिफिकेशन आईटीआर भरने के बाद की सबसे खास प्रक्रिया है। इसके जरिए करदाता पुष्टि करता है कि ITR में दी गई सभी जानकारी उसी ने सही तरीके से जमा की है। इसके बाद ही आयकर विभाग रिटर्न को प्रोसेस करता है।
e-Verification नहीं किया तो क्या होगा?
ITR को अमान्य माना जा सकता है।
टैक्स रिफंड मिलने में देरी होगी।
प्रोसेसिंग शुरू नहीं होगी।
ब्याज का लाभ प्रभावित हो सकता है।
आयकर विभाग की ओर से स्पष्टीकरण या नोटिस मिल सकता है।
जरूरत पड़ने पर दोबारा ITR दाखिल करना पड़ सकता है।
ऐसे करें e-Verification
सबसे पहले आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें
अब e-File सेक्शन में जाएं
उसके बाद Income Tax Return पर क्लिक करें
अब e-Verify Return विकल्प चुनें
अपनी पसंद का वेरिफिकेशन माध्यम चुनें
OTP या EVC दर्ज करें
सफल सत्यापन के बाद स्क्रीन पर कन्फर्मेशन मैसेज दिखाई देगा
अगर आपका ई-वेरिफिकेशन पूरा हो जाता है, तो उसके बाद आयकर विभाग आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू करता है। यदि आपके टैक्स की गणना सही पाई जाती है और रिफंड बनता है, तो सीधे आपके प्री-वैलिडेटेड बैंक खाते में पैसे भेज दिए जाते है। अगर ई-वेरिफिकेशन के बाद भी आपके आईटीआर में कोई गलती मिलती है, तो भी रिफंड को रोका जा सकता है।















