प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 5 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है। इनमें रेलवे और सड़क बुनियादी ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। कैबिनेट के फैसलों में हावड़ा-चेन्नई रूट को चार लेन करने और खड़गपुर-भद्रा रेल रूट पर चार लाइन बिछाने से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख हैं। इन परियोजनाओं के लिए सरकार ने करीब 13,041 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
हावड़ा-चेन्नई रूट को मिलेगी बड़ी मजबूती
कैबिनेट ने हावड़ा-चेन्नई रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस रूट पर अतिरिक्त ट्रैक/लाइन बिछने से यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। हावड़ा-खड़गपुर सेक्शन पहले से ही हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं पर केंद्र लगातार जोर दे रहा है। अतिरिक्त लाइन बनने से व्यस्त रूटों पर ट्रेनों के संचालन में आसानी और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
किन रूट पर होंगे काम?
कैबिनेट से मंजूर चार प्रोजेक्ट अलग-अलग राज्यों से होकर गुजरेंगे। इनमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।
खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: 173 KM
भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: 75 KM
गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: 90 KM
कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) तीसरी और चौथी लाइन: 72 KM
खड़गपुर-भद्रा रूट पर भी चार लाइन को मंजूरी
कैबिनेट ने खड़गपुर-भद्रा रेल रूट से जुड़ी परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत चार लाइन की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव है। इससे पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
13,041 करोड़ रुपये का बजट
इन परियोजनाओं के लिए कुल करीब 13,041 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार का फोकस देश के प्रमुख रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने, माल ढुलाई को आसान बनाने और यात्रियों के लिए रेल कनेक्टिविटी को बेहतर करने पर है।
रेलवे में तीसरी और चौथी लाइन जैसी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी देने का उद्देश्य मौजूदा नेटवर्क पर ट्रैफिक दबाव कम करना और भविष्य की जरूरतों के लिए रेल क्षमता बढ़ाना है। इससे लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट के 5 फैसलों पर लगी मुहर
बुधवार की बैठक में कुल पांच प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें बुनियादी ढांचे और रेल कनेक्टिविटी से जुड़े फैसले अहम हैं। सरकार की ओर से इन परियोजनाओं की विस्तृत लागत, लंबाई और राज्यों को होने वाले लाभ का पूरा ब्योरा सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस रेल परियोजना की कुल लंबाई 173 किलोमीटर होगी और इसे पूरा करने में करीब 3,352 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस परियोजना से बालेश्वर, भद्रक और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों को सीधे लाभ मिलेगा। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस क्षेत्र में कई सीमेंट प्लांट, स्टील प्लांट, पावर प्लांट और औद्योगिक केंद्र स्थित हैं। ऐसे में नई रेल कनेक्टिविटी से इन उद्योगों के लिए माल ढुलाई आसान और तेज होने की उम्मीद है।
हाईवे से रेलवे पर आएगा 1.3 करोड़ टन माल
रेल मंत्री ने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद करीब 13 मिलियन टन यानी 1.3 करोड़ टन माल हाईवे से रेलवे के जरिए ट्रांसपोर्ट किया जाएगा। इससे सड़कों पर मालवाहक वाहनों का दबाव कम होगा और लॉजिस्टिक्स की लागत घटाने में भी मदद मिल सकती है।
21 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि माल ढुलाई को सड़क से रेल नेटवर्क पर शिफ्ट करने से हर साल करीब 21 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन बचाने में मदद मिलेगी। इससे परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। यह परियोजना पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।















