हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पुरानी पेंशन योजना (OPS) के तहत शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवा को जोड़कर लाभ देने के लिए एक स्पष्ट नीति बनाए। यह आदेश असिस्टेंट टीचर और एजुकेशन वर्कर की ओर से दायर याचिका पर दिया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की अध्यक्षता वाली बेंच ने की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट मतीन सिद्दीकी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में कार्यरत असिस्टेंट टीचर, शिक्षक और LB कैडर के शिक्षक, जिनकी नियुक्ति वर्ष 1998-99 में पंचायत या शहरी निकाय के अंतर्गत एजुकेशन वर्कर के रूप में हुई थी, तब से लगातार सेवा दे रहे हैं।
साल 2018 में इन सभी शिक्षाकर्मियों को स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज कर दिया गया और राज्य सरकार ने दोबारा पुरानी पेंशन योजना लागू की। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पेंशन के लिए उनकी सेवा की गणना शुरुआती नियुक्ति, रेगुलराइजेशन या 2018 के मर्जर की तारीख से होगी।
स्पष्ट निर्देशों के अभाव में 1 अप्रैल 2012 से पंचायत और नगर निकाय कैडर के शिक्षकों पर नई पेंशन योजना (NPS) लागू कर दी गई। इसके तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से 10 प्रतिशत राशि काटी जा रही है, जिसमें उतनी ही राशि सरकार की ओर से भी जोड़ी जाती है।
इस फैसले से नाराज़ LB कैडर के शिक्षकों ने हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि सरकार ने मर्जर के समय पहले की 8 साल की सेवा को मानते हुए शिक्षाकर्मियों को स्कूल शिक्षा विभाग में शामिल किया था। बाद में नियम बदलकर सेवा अवधि की शर्त को घटाकर 2 साल कर दिया गया।
वकील ने कहा कि जब शिक्षाकर्मी आज सरकारी वेतनमान और अन्य सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं, तो उनकी मर्जर से पहले की सेवा को नजरअंदाज कर पुरानी पेंशन का लाभ न देना गलत है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि शिक्षाकर्मियों को 1 जुलाई 2018 के बाद ही स्कूल शिक्षा विभाग का कर्मचारी माना गया, और सभी लाभ उसी तारीख से दिए जाएंगे। इससे पहले की अवधि के लिए किसी तरह का एरियर देय नहीं होगा।
















