छत्तीसगढ़ के रायपुर में सोलर स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट दिलाने के नाम पर 53.60 लाख रुपए की बड़ी ठगी का मामला सामने आने से कारोबारी वर्ग में हड़कंप मच गया है। खम्हारडीह थाना में दर्ज शिकायत के अनुसार आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली और राजनेताओं से जुड़ा बताकर पीड़ित कारोबारी का भरोसा जीता और सरकारी टेंडर दिलाने का झांसा दिया। धीरे-धीरे उन्होंने निवेश के नाम पर अलग-अलग किश्तों में लाखों रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए।
लाखों की ठगी कर हुए गायब
शुरुआत में काम जल्द मिलने और भारी मुनाफे का भरोसा दिलाया गया, लेकिन समय बीतने के साथ आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी और आखिरकार संपर्क तोड़ लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल्स और दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है, वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दबिश की तैयारी की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी प्रोजेक्ट और टेंडर के नाम पर संगठित तरीके से ठगी की जा रही है, जिससे निवेशकों और व्यापारियों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
प्रोजेक्ट दिलाने का झांसा, लाखों की ठगी
जानकारी के अनुसार, कचना निवासी कारोबारी अंकित गोयल ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि वर्ष 2024 में उनकी पहचान नयनित खेड़िया के माध्यम से राहुल शुक्ला से हुई। आरोपी ने खुद को प्रभावशाली और बड़े नेताओं व अधिकारियों का करीबी बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह बस्तर संभाग की ग्राम पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का सरकारी ठेका दिला सकता है।
मुनाफे का लालच देकर कराया निवेश
आरोप है कि आरोपी ने दावा किया कि हर सोलर स्ट्रीट लाइट पर करीब ₹48 हजार का भुगतान मिलेगा, जिससे बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसी लालच में आकर कारोबारी को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद आरोपी राहुल शुक्ला, उसकी पत्नी और अन्य सहयोगियों ने मिलकर अलग-अलग समय पर नकद और बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹53.60 लाख रुपए हासिल कर लिए।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर बनाया भरोसा
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने जैंको कंपनी और सरकारी टेंडर से जुड़े फर्जी दस्तावेज दिखाकर विश्वास जीतने की कोशिश की। दस्तावेज देखने के बाद कारोबारी को योजना वास्तविक लगी और उसने निवेश कर दिया। हालांकि, समय बीतने के साथ आरोपियों ने काम शुरू करने में टालमटोल शुरू कर दी और न तो प्रोजेक्ट मिला, न ही पैसे वापस किए गए।
पुलिस जांच तेज, आरोपियों की तलाश
खम्हारडीह थाना पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच के तहत बैंक ट्रांजैक्शन की पड़ताल की जा रही है, कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं और दस्तावेजों की सत्यता की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर जल्द ही दबिश दी जाएगी।
सरकारी टेंडर के नाम पर बढ़ते फर्जीवाड़े
यह मामला एक बार फिर सामने लाता है कि सरकारी टेंडर और प्रोजेक्ट के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ठग खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताकर विश्वास हासिल करते हैं और फिर निवेश के नाम पर बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं।
व्यापारियों में बढ़ी चिंता, सतर्क रहने की जरूरत
इस घटना के बाद व्यापारियों और निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रोजेक्ट या निवेश से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि और दस्तावेजों की जांच जरूरी है, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।
निष्कर्ष: भरोसा बना ठगी का जरिया
रायपुर का यह मामला बताता है कि ठग अब अधिक संगठित और योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस की जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा, लेकिन फिलहाल यह घटना निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक बनकर सामने आई है।
















