मानसून सत्र के दौरान पारित बिल, सार्वजनिक परीक्षाओं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल 2026, अब एक कानून के रूप में लागू हो चुका है। इस कानून को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुमोदित किया है और इसके तुरंत बाद गजट अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इस नए कानून का उद्देश्य प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में लीक, नकल, या किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोकना है। इसके अंतर्गत अपराधियों के लिए सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
कानून के तहत सजा और जुर्माने के प्रावधान
आपको बता दें कि एंटी पेपर लीक कानून पहले से बेहद ज्यादा कड़ी हो गई है. इसके तहत पेपर लीक करने और परीक्षा में धांधली करने पर 5 से 10 साल तक की जेल पर कड़ी सजा का प्रावधान है. वहीं जुर्माने की रकम 10 लाख से बढ़कर 50 लाख की गई है. वहीं सर्विस प्रोवाइडर पर 5 करोड़ तक जुर्माना लगेगा, जबकि पहले जुर्माना 1 करोड़ था
दोषी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की अवधि 4 से बढ़कर 8 साल हो गई है. संगठित अपराध पर 7 से 10 साल जेल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार मिल गया है. पुलिस, CBI या STF को तय समयसीमा यानी 2 महीने में जांच पूरी करनी होगी. मामलों की रोज स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होगी
जानें कानून के दायरे में कौन-कौन आएगा?
जानकारी के मुताबिक आपको बता दें कि मानसून सत्र 2026 में विपक्ष के हंगामे के बीच बिल को लोकसभा और राज्यसभा में पास कराकर अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति मुर्मू के पास भेजा गया था. जिन्होंने बिल को मंजूरी देकर कानून बना दिया और इसका गजट नोटिफिकेशन जारी करने का आदेश दिया. अब नए संशोधित कानून के तहत पेपर लीक या नकल कराने वाले गिरोह, कोचिंग इंस्टीट्यूट और सर्विस प्रोवाइडर पर नकेल कसी जाएगी.
इस कानून के दायरे में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार के दूसरे मंत्रालयों के अलावा शिक्षा विभाग आएगा.















