मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। जवाब में ईरान ने इजराइल के साथ-साथ कतर, कुवैत, यूएई और बहरीन जैसे खाड़ी देशों की ओर मिसाइलें दागने का दावा किया है।
इस बीच, ईरान से एक बड़ी खबर सामने आई है कि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन की जानकारी सामने आई है, हालांकि इस खबर की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। क्षेत्र में बढ़ता तनाव अब वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
तेल सप्लाई पर संकट गहराने की आशंका
जानकारों का कहना है कि हालात बिगड़ने का सबसे बड़ा असर तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। ईरान दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है और Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग पर उसका नियंत्रण है। इस जलडमरूमध्य से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। अगर यह मार्ग प्रभावित होता है, तो वैश्विक सप्लाई बाधित हो सकती है।
भारतीय बाजार पर दिख सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है और बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। अनुमान है कि बाजार में 1 से 2 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
महंगाई बढ़ने की भी चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा है। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
इन सेक्टरों पर पड़ेगा ज्यादा असर
तेल महंगा होने से सबसे ज्यादा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़ेगा। इसके अलावा एविएशन, पेंट और टायर इंडस्ट्री भी प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि ये सभी सेक्टर कच्चे तेल पर काफी निर्भर हैं।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है, जिसका असर भारत पर भी साफ नजर आ सकता है।
















