अगर आप डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते हैं, तो नए नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 21 अप्रैल को ई-मैंडेट (E-Mandate) से जुड़े नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
इन नए नियमों के तहत डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करने के लिए अब अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन फैक्टर (AFA) अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम कार्ड, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स और यूपीआई जैसे इंटीग्रेटेड पेमेंट सिस्टम के जरिए होने वाले सभी रेक्यरिंग पेमेंट पर लागू होंगे, चाहे वे देश के भीतर हों या विदेश में।
आरबीआई ने साफ किया है कि ई-मैंडेट की सुविधा लेने वाले ग्राहकों को एक बार रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी करने और अतिरिक्त प्रमाणीकरण (AFA) सफल होने पर ही मैंडेट को मंजूरी दी जाएगी।
ये नए निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
RBI की गाइडलाइंस में क्या-क्या?
रिजर्व बैंक ने कहा कि 15,000 रुपये से अधिक के रेकरिंग ट्रांजेक्शन के लिए एक्स्ट्रा ऑथेंटिकेशन की आवश्यकता होगी। इंश्योरेंस प्रीमियम, म्यूचुअल फंड मेंबर और 1 लाख रुपये से अधिक के क्रेडिट कार्ड बिल जैसे भुगतानों के लिए भी वेरिफिकेशन की एक अतिरिक्त लेयर की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, किसी भी ई-मैंडेट के तहत पहले ट्रांजेक्शन को एक एक्सट्रा फैक्टर के साथ प्रमाणित किया जाना चाहिए। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि ई-मैंडेट के तहत किए गए भुगतान ग्राहकों द्वारा निर्धारित किसी भी अलग सीमा या नियंत्रण के अधीन नहीं होंगे।
















