प्रदेश सरकार ने स्वामी आत्मानंद स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों से 1500 रुपये वार्षिक फीस लेने का फैसला किया है। इस संबंध में शासन स्तर पर जानकारी दी गई है, हालांकि जिला स्तर के अधिकारी अभी आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
रायपुर में आयोजित प्राचार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस निर्णय की जानकारी दी थी। इस घोषणा के बाद अभिभावकों और शिक्षा जगत में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।शहर और स्थानीय मार्गदर्शिका
स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शुरुआत वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गरीब, वंचित और मध्यम वर्गीय बच्चों को निशुल्क अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा देने के उद्देश्य से की थी। वर्तमान में प्रदेश में ऐसे 751 स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां छात्रों को किताबें और यूनिफॉर्म सहित शिक्षा पूरी तरह मुफ्त दी जाती है।
अब 9वीं से 12वीं तक फीस लागू होने के फैसले के बाद निजीकरण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ अभिभावक आशंका जता रहे हैं कि कहीं इन स्कूलों का स्वरूप भी पहले के मॉडल स्कूलों जैसा न हो जाए।
गौरतलब है कि पहले डॉ. रमन सिंह सरकार के दौरान मॉडल स्कूल शुरू किए गए थे, जिन्हें बाद में डीएवी प्रबंधन को सौंप दिया गया था और अब वे मुख्यमंत्री डीएवी स्कूल के नाम से संचालित हो रहे हैं।















