Raigarh News : RGHNEWS@Prashant Tiwari रायगढ़। कोकडीतराई जलाशय की जमीन और सिंचाई परियोजना से जुड़ी भूमि पर कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अब परसदा गांव में नहर की मेड़ पर निजी स्कूल भवन खड़े किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि नहर के किनारे करीब 10 फीट चौड़ी पट्टी का इस्तेमाल रास्ते और निर्माण के लिए किया गया है। मामला सामने आने के बाद जल संसाधन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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बताया जा रहा है कि कोकड़ी तराई जलाशय से निकलने वाली नहर के किनारे डिवाइन वैली स्कूल का भवन बना हुआ है। जिस हिस्से में निर्माण बताया जा रहा है, वह नहर की मेड़ से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जमीन का इस्तेमाल सिंचाई व्यवस्था के लिए होना चाहिए, वहां निजी निर्माण की अनुमति कैसे मिली?
*पहले जलाशय की जमीन, अब नहर की मेड़ पर सवाल*
कोकड़ी तराई जलाशय क्षेत्र में जमीन पर कब्जे और प्लॉटिंग को लेकर पहले भी मामला सामने आ चुका है। करीब 10 एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जे की बात सामने आई थी। अब उसी परियोजना से जुड़ी नहर की जमीन पर निजी भवन निर्माण का मामला सामने आने से विवाद और बढ़ गया है।
जानकारी के मुताबिक जल संसाधन विभाग की ओर से ऐसे मामलों में पूर्व में नोटिस भी जारी किए गए हैं। विभागीय रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित निर्माण किस जमीन पर हुआ है।
*108 किसानों से अधिग्रहित हुई थी जमीन*
कोकड़ी तराई जलाशय परियोजना के लिए वर्ष 1978 में कोकड़ी तराई, चेरझापानी, उच्चभिट्ठी और परसदा के 108 किसानों की करीब 72.455 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। इस जमीन का उपयोग जलाशय और सिंचाई परियोजना के लिए किया गया।
जलाशय की भंडारण क्षमता करीब 2.44 एमसीएम बताई गई है। इसमें लगभग 2.32 एमसीएम लाइव स्टोरेज और 0.12 एमसीएम डेड स्टोरेज शामिल है।
*6.6 किमी लंबी मुख्य नहर से 526 हेक्टेयर जमीन सिंचित*
कोकड़ी तराई जलाशय से निकलने वाली मुख्य नहर करीब 6.6 किलोमीटर लंबी है, जबकि शाखा नहरों की लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर बताई गई है। इस सिंचाई परियोजना से करीब 526 हेक्टेयर कृषि भूमि को पानी मिलता है। ऐसे में नहर की जमीन और उसकी मेड़ पर किसी भी तरह का निर्माण सिंचाई व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

*स्कूल की मान्यता और जमीन के दस्तावेज भी जांच के दायरे में*
मामले में स्कूल भवन की मान्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्कूल की मान्यता के लिए भवन के साथ जमीन, परिसर और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में अब यह भी जांच का विषय होगा कि स्कूल भवन जिस जमीन पर बना है, उसके स्वामित्व और उपयोग की स्थिति क्या है।
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*मौके की जांच से खुलेगा पूरा राज*
अब पूरे मामले में मौके का सीमांकन और विभागीय रिकॉर्ड से मिलान सबसे अहम होगा। राजस्व रिकॉर्ड, जल संसाधन विभाग के नक्शे और मौके पर बने निर्माण की स्थिति की जांच के बाद ही वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
अगर जांच में नहर की सरकारी जमीन या उसकी मेड़ पर निर्माण की पुष्टि होती है, तो सवाल यह भी उठेगा कि निर्माण के दौरान संबंधित विभागों ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
















