वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में अचानक आई तेजी ने एक बार फिर सरकार और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। करीब दो महीने बाद ब्रेंट क्रूड का भाव फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इससे पहले 22 मई को इसकी कीमत 100 डॉलर से ऊपर थी। पिछले एक महीने की बात की जाए तो ब्रेंट क्रूड की कीमत में 33% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
कच्चे तेल में आई इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष है। इसके साथ ही, लाल सागर और बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाने और नाकेबंदी के ऐलान ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करने की आशंका बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से भी शिपिंग ट्रैफिक कम होने के कारण मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड $120 प्रति बैरल तक भी पहुंच सकता है।
भारत के लिए क्यों है यह बड़े खतरे की घंटी?
कच्चे तेल में तेजी भारत के लिए दोहरे झटके की तरह होती है:
आयात बिल में भारी बढ़ोतरी: भारत अपनी जरूरत का 85% से 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। कच्चा तेल महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल और चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़ता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव आता है।
क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम?
भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर कच्चे तेल के महंगे होने से मार्जिन का दबाव काफी बढ़ गया है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड $100 प्रति बैरल के ऊपर टिका रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती है। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को सीधे झटके से बचाने के लिए पहले एक्साइज ड्यूटी या रिफाइनरी मार्जिन के जरिए दबाव को सोखने की कोशिश करती हैं। लेकिन अगर यह संकट आने वाले हफ्तों में शांत नहीं हुआ, तो आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
















