बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय का समापन हो गया है. नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया. दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहने वाले नीतीश के इस फैसले ने पूरे देश के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. इस्तीफा देने के बाद उन्होंनेअपना पहला बयान जारी करते हुए कहा कि अब नई सरकार बिहार के काम को आगे बढ़ाएगी और उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन नई व्यवस्था के साथ रहेगा. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि हमने बिहार की जनता के लिए बहुत काम किया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि आने वाली सरकार भी राज्य के विकास के लिए अच्छा काम करती रहेगी. इस बड़े बदलाव के बाद अब चर्चा है कि बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री और जदयू से दो उपमुख्यमंत्री बन सकते हैं.
आप जानते हैं कि 24 नवंबर, 2005 को राज्य में पहली बार एन०डी०ए० सरकार बनी थी। तब से राज्य में कानून का राज है और हम लगातार विकास के काम में लगे हुए हैं। सरकार ने शुरू से ही सभी तबकों का विकास किया है चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, अपर कास्ट हो, पिछड़ा हो, अति पिछड़ा हो,
राजनीति की नई पारी और निशांत कुमार का सस्पेंस
बिहार के इस सत्ता परिवर्तन के बीच एक नया नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है और वह है नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का. जैसे ही नीतीश कुमार ने सक्रिय राजनीति से पीछे हटने के संकेत दिए तभी से यह सवाल उठने लगा कि क्या उनकी राजनीतिक विरासत अब निशांत कुमार संभालेंगे. हालांकि निशांत कुमार ने फिलहाल उपमुख्यमंत्री जैसे बड़े संवैधानिक पद से दूरी बनाकर सबको हैरान कर दिया है. जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के अनुसार निशांत कुमार अब पार्टी संगठन में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं और वे लगातार कार्यकर्ताओं से मिलकर सुझाव भी दे रहे हैं. जानकारों का मानना है कि निशांत कुमार फिलहाल किसी पद की लालसा के बजाय संगठन की जमीनी हकीकत को समझने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं ताकि वे अपनी एक स्वतंत्र पहचान बना सकें.
















