महानदी नदी को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले लगभग दस साल से चला आ रहा विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। यह विवाद मुख्य रूप से जल बंटवारे और नदी पर बनाए गए बैराजों को लेकर है। मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) में लंबित है। अब चूंकि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसलिए आपसी सहमति से समाधान की दिशा में पहल तेज हो गई है।
छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे ओडिशा के डिप्टी सीएम
दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर पहले भी एक-दो दौर की बातचीत हो चुकी है। इसी क्रम में अब ओडिशा के डिप्टी मुख्यमंत्री केवी सिंह देव की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति छत्तीसगढ़ का दौरा करेगी। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार यह दौरा 31 जनवरी से 1 फरवरी के बीच हो सकता है। दौरे का उद्देश्य छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चर्चा कर विवाद पर साझा सहमति बनाना है।
इस दौरान डिप्टी सीएम केवी सिंह देव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। इसके अलावा महानदी से जुड़े सामाजिक संगठनों और हितधारकों से भी बातचीत की जाएगी, ताकि सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखा जा सके। उल्लेखनीय है कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र से होता है। यह नदी करीब 851 किलोमीटर लंबी है और ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है।
7 फरवरी को ट्रिब्यूनल में सुनवाई
महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण में अगली सुनवाई 7 फरवरी को प्रस्तावित है, जहां दोनों राज्य अपने-अपने पक्ष रखेंगे। इस ट्रिब्यूनल का गठन 12 मार्च 2018 को किया गया था और इसकी अवधि जल्द समाप्त होने वाली है। हालांकि ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार से इसकी समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि अंतिम निर्णय प्रक्रिया पूरी हो सके।
क्या है महानदी जल विवाद
महानदी जल विवाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच नदी के पानी के उपयोग और बंटवारे को लेकर है। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने नदी के ऊपरी हिस्से में बैराज और अन्य जल संरचनाएं बनाकर प्राकृतिक जल प्रवाह को प्रभावित किया है, जिससे ओडिशा के हिराकुद बांध और सिंचाई परियोजनाओं को मिलने वाला पानी कम हो गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार का पक्ष
छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि उसने किसी भी अंतरराज्यीय जल समझौते का उल्लंघन नहीं किया है। राज्य के अनुसार, सभी परियोजनाएं उसके वैधानिक अधिकार क्षेत्र में आती हैं और इनका उद्देश्य केवल पेयजल और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करना है, न कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोकना।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बना ट्रिब्यूनल
इस विवाद को लेकर वर्ष 2016 में ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया। अब ट्रिब्यूनल को यह तय करना है कि दोनों राज्यों को महानदी के पानी का कितना हिस्सा मिलेगा, किन शर्तों पर मिलेगा और भविष्य की परियोजनाओं के लिए क्या नियम लागू होंगे।
यह है खास बातें
नदी: महानदी
उद्गम: सिहावा (छत्तीसगढ़)
लंबाई: लगभग 851 किमी
विवाद: जल बंटवारा और बैराज निर्माण
कानूनी मंच: महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण
स्थिति: फैसला लंबित















